नेपाल में बाढ़ से भारी तबाही के बाद करीब 20 हजार घरों के पुनर्निर्माण की चुनौती है। 1259 लोगों की मौत और 5000 से ज्यादा लोग लापता हैं।
नेपाल में बाढ़ से भारी तबाही, 20 हजार घर बनाने की चुनौती; 1259 लोगों की मौत, 5000 से ज्यादा लापता
काठमांडू: नेपाल में आई विनाशकारी बाढ़ ने कई इलाकों में जनजीवन को पूरी तरह बदलकर रख दिया है। बाढ़ और भूस्खलन से बड़ी संख्या में घर तबाह हो गए हैं, हजारों लोग बेघर हो चुके हैं और कई परिवार अब भी अपने लापता परिजनों की तलाश में हैं। अधिकारियों के शुरुआती आकलन के मुताबिक, प्रभावित क्षेत्रों में लोगों को दोबारा बसाने के लिए करीब 20 हजार नए घरों का निर्माण करना पड़ सकता है।
नेपाल में इस प्राकृतिक आपदा के कारण अब तक करीब 1259 लोगों की मौत की जानकारी सामने आई है, जबकि 5000 से अधिक लोग अभी भी लापता बताए जा रहे हैं। दूसरी ओर, पनबिजली परियोजनाओं की सुरंगों में फंसे लोगों को सुरक्षित बाहर निकालने के लिए बचाव अभियान लगातार जारी है।
तिब्बत में ग्लेशियर टूटने के बाद नेपाल में बढ़ा संकट
नेपाल में आई इस आपदा की शुरुआत तिब्बत में 26 अगस्त को ग्लेशियर टूटने की घटना के बाद हुई। इसके बाद अचानक आई बाढ़ ने नेपाल के कई हिस्सों में भारी तबाही मचाई। तेज पानी अपने साथ घरों, सड़कों और दूसरी संरचनाओं को बहाकर ले गया, जबकि कई इलाकों में भारी मात्रा में मलबा और कीचड़ जमा हो गया।
नेपाल के राष्ट्रीय आपदा जोखिम न्यूनीकरण एवं प्रबंधन प्राधिकरण (NDRRMA) के प्रमुख धर्मराज उप्रेती के अनुसार, शुरुआती आकलन में करीब 7500 घर पूरी तरह तबाह, बह या मलबे में दब चुके हैं। कई ऐसे मकान भी हैं जो बाहर से खड़े दिखाई दे रहे हैं, लेकिन उन्हें रहने के लिए सुरक्षित नहीं माना जा रहा है।
इसी वजह से सरकार के सामने सिर्फ राहत और बचाव कार्य की चुनौती नहीं है, बल्कि प्रभावित परिवारों के लिए सुरक्षित स्थानों पर बड़े पैमाने पर पुनर्वास की जिम्मेदारी भी आ गई है। अधिकारियों का अनुमान है कि अलग-अलग सुरक्षित क्षेत्रों में करीब 20 हजार घरों का पुनर्निर्माण करना पड़ सकता है।
पुनर्वास के लिए बड़े संसाधनों की जरूरत
नेपाल सरकार के सामने अब प्रभावित लोगों को तत्काल राहत देने के साथ-साथ लंबे समय के पुनर्निर्माण की चुनौती है। विदेश मंत्री शिशिर खनाल ने काठमांडू में विदेशी राजदूतों को स्थिति की जानकारी देते हुए कहा कि प्रभावित इलाकों को दोबारा खड़ा करने के लिए बड़े स्तर पर संसाधनों की जरूरत होगी।
बाढ़ से प्रभावित कई क्षेत्रों में घरों के साथ-साथ स्थानीय बुनियादी ढांचे को भी नुकसान पहुंचा है। ऐसे में पुनर्निर्माण केवल मकान बनाने तक सीमित नहीं रहेगा। लोगों की सुरक्षित वापसी, सड़क और संपर्क व्यवस्था की बहाली तथा आवश्यक सेवाओं को दोबारा शुरू करना भी सरकार की प्राथमिकताओं में शामिल होगा।
7 सितंबर को नेपाल में मनाया जाएगा राष्ट्रीय शोक
इस त्रासदी में जान गंवाने वाले लोगों की याद में नेपाल सरकार ने 7 सितंबर को राष्ट्रीय शोक मनाने का फैसला किया है। प्रधानमंत्री बालेंद्र शाह की कैबिनेट ने आपदा के 13वें दिन राष्ट्रीय शोक मनाने का निर्णय लिया है।
नेपाल की हिंदू परंपरा में 13वां दिन शोक की अवधि के औपचारिक समापन से जुड़ा माना जाता है। ऐसे में सरकार का यह फैसला आपदा में मारे गए लोगों को श्रद्धांजलि देने और उनके परिवारों के प्रति संवेदना व्यक्त करने के तौर पर देखा जा रहा है।
1400 नेपाली नागरिक अभी भी तिब्बत में फंसे
बाढ़ और आपदा का असर नेपाल तक ही सीमित नहीं है। नेपाल सरकार के मुताबिक, तिब्बत में फंसे 114 नेपाली नागरिकों को बचा लिया गया है और उनकी सुरक्षित वापसी की व्यवस्था की जा रही है।
हालांकि, केरुंग बॉर्डर पॉइंट पर करीब 1400 नेपाली नागरिक अभी भी फंसे हुए हैं। उनकी सुरक्षित निकासी को लेकर भी प्रयास जारी हैं। इसके अलावा नेपाल में करीब 583 विदेशी नागरिकों के लापता होने की जानकारी दी गई है।
इन आंकड़ों से अंदाजा लगाया जा सकता है कि आपदा का प्रभाव कितना व्यापक है और राहत एवं बचाव एजेंसियों के सामने कितनी बड़ी चुनौती बनी हुई है।
सुरंगों में फंसे लोगों की तलाश जारी
बाढ़ के बाद पनबिजली परियोजनाओं से जुड़ी सुरंगों में फंसे लोगों को बाहर निकालना बचाव दलों के लिए सबसे कठिन अभियानों में से एक बना हुआ है। एक सैन्य अधिकारी के अनुसार, करीब 900 लोगों की तलाश की जा रही है।
इस अभियान में नेपाल की टीमों के साथ भारत, दक्षिण कोरिया और चीन के विशेषज्ञ भी सहयोग कर रहे हैं। सुरंगों में मलबा और कठिन परिस्थितियां बचाव कार्य को चुनौतीपूर्ण बना रही हैं।
नेपाल सेना के सैन्य प्रवक्ता राजा राम बस्नेत ने बताया कि लांगटांग खोला पनबिजली संयंत्र की सुरंग से दो शव बरामद किए गए हैं। सुरंगों में फंसे अन्य लोगों की तलाश के लिए अभियान आगे भी जारी रहने की बात कही गई है।
भारतीय राजदूत ने स्याब्रुबेसी में बचाव कार्य का लिया जायजा
नेपाल में भारत के राजदूत नवीन श्रीवास्तव ने गुरुवार को स्याब्रुबेसी का दौरा किया। इस दौरान उन्होंने सुरंग में चल रहे बचाव अभियान का निरीक्षण किया। भारत और नेपाल की टीमों द्वारा संयुक्त रूप से किए जा रहे राहत एवं बचाव प्रयासों की भी जानकारी ली गई।
फिलहाल नेपाल में Nepal Flood के बाद राहत, बचाव और पुनर्वास तीनों मोर्चों पर काम चल रहा है। तत्काल चुनौती लोगों की जान बचाने और लापता लोगों का पता लगाने की है, जबकि आने वाले समय में हजारों परिवारों को दोबारा बसाना सरकार के लिए सबसे बड़ी जिम्मेदारियों में से एक होगा।
करीब 20 हजार घरों के पुनर्निर्माण का अनुमान इस आपदा के पैमाने को साफ तौर पर दिखाता है। आने वाले दिनों में सरकार और अंतरराष्ट्रीय सहयोग के जरिए प्रभावित इलाकों में राहत कार्य के साथ-साथ स्थायी पुनर्वास और पुनर्निर्माण की प्रक्रिया को आगे बढ़ाना महत्वपूर्ण होगा।

