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Om Birla No Confidence Motion: संसद में टकराव, विपक्ष का हमला और लोकतंत्र खतरे में

Om Birla No Confidence Motion

विपक्षी दलों ने लोकसभा स्पीकर ओम बिरला के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव का नोटिस दिया, जिससे संसद में राजनीतिक तनाव और टकराव और गहरा गया।

Om Birla No Confidence Motion को लेकर संसद में जबरदस्त टकराव देखने को मिला। विपक्ष ने स्पीकर पर पक्षपात के गंभीर आरोप लगाए, जिससे लोकतंत्र पर संकट और राजनीतिक तनाव गहराता नजर आ रहा है।

Om Birla No Confidence Motion संसद में क्यों मचा राजनीतिक भूचाल?

भारतीय संसद एक बार फिर गंभीर राजनीतिक तनाव और अविश्वास के दौर से गुजर रही है। विपक्षी दलों ने लोकसभा स्पीकर ओम बिरला के खिलाफ Om Birla No Confidence Motion दायर कर दिया है, जिससे संसद की निष्पक्षता और लोकतांत्रिक मर्यादाओं पर बड़ा सवाल खड़ा हो गया है।
विपक्ष का आरोप है कि स्पीकर पद की गरिमा को दरकिनार करते हुए सदन में सत्तारूढ़ भाजपा को खुला पक्षपातपूर्ण लाभ दिया जा रहा है।

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अविश्वास प्रस्ताव क्यों लाया गया?

कांग्रेस सांसद गौरव गोगोई ने मंगलवार को जानकारी दी कि विपक्ष ने संविधान के अनुच्छेद 94(C) के तहत लोकसभा स्पीकर ओम बिरला को हटाने के लिए नोटिस सौंपा है।
यह Om Birla No Confidence Motion लोकसभा के सचिव-जनरल को सौंपा गया है, जिसे अब सदन के नियमों के अनुसार जांचा और प्रोसेस किया जाएगा।

“कई मौकों पर नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी को बोलने की अनुमति नहीं दी गई। यह सिर्फ कांग्रेस नहीं, बल्कि पूरे विपक्ष की चिंता है,” – गोगोई

Article 94(C) क्या कहता है?

Article 94(C) के अनुसार:

हालांकि, मौजूदा बजट सत्र 13 फरवरी को समाप्त हो रहा है, इसलिए यह संभावना कम है कि यह प्रस्ताव इस सत्र में चर्चा के लिए आए।

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राहुल गांधी को बोलने से रोकना बना बड़ा मुद्दा

इस पूरे Om Birla No Confidence Motion की जड़ पिछले सप्ताह की एक बड़ी घटना है।
राहुल गांधी संसद में पूर्व सेना प्रमुख जनरल एमएम नरवणे की किताब से लद्दाख सीमा विवाद (2020) से जुड़ा अंश पढ़ना चाहते थे, लेकिन उन्हें इसकी अनुमति नहीं दी गई।

विपक्ष का आरोप है कि:

भाजपा सांसद को छूट, विपक्ष नाराज़

विपक्ष ने यह भी सवाल उठाया कि:

उस समय पीठासीन अधिकारी कृष्णा टेनेटी (TDP) ने दुबे को रोकने की कोशिश की, लेकिन उन्होंने आदेश मानने से इनकार कर दिया।
इसके बावजूद स्पीकर की ओर से कोई अनुशासनात्मक कार्रवाई नहीं हुई, जिसने विपक्ष के गुस्से को और भड़का दिया।

महिला सांसदों पर बयान से विवाद और गहराया

हालात तब और बिगड़ गए जब स्पीकर ओम बिरला ने दावा किया कि:

स्पीकर ने यह भी कहा कि इसी कारण उन्होंने पीएम को सदन में न आने की सलाह दी, जिसके चलते प्रधानमंत्री का लोकसभा भाषण रद्द हो गया।

विपक्ष ने इस बयान को:

“Women MPs and Parliamentary Ethics”)

संसद में हंगामा और बार-बार स्थगन

बीते दो हफ्तों में:

यह पूरा घटनाक्रम दर्शाता है कि सरकार और विपक्ष के बीच विश्वास की खाई कितनी गहरी हो चुकी है।

Om Birla No Confidence Motion के प्रमुख आरोप

विपक्ष द्वारा प्रस्ताव में शामिल किए जाने वाले मुख्य बिंदु:

निष्कर्ष

Om Birla No Confidence Motion सिर्फ एक राजनीतिक प्रस्ताव नहीं, बल्कि भारतीय लोकतंत्र की निष्पक्षता की परीक्षा है।
हालांकि यह प्रस्ताव मौजूदा सत्र में आगे बढ़े या नहीं, लेकिन इसने यह साफ कर दिया है कि संसद के भीतर असंतोष, टकराव और अविश्वास चरम पर पहुंच चुका है।

आने वाला मानसून सत्र यह तय करेगा कि यह विवाद संसदीय सुधार की दिशा में जाएगा या फिर राजनीतिक गतिरोध और गहराएगा

Om Birla No Confidence Motion रिपोर्ट में दी गई जानकारी NDTVjansatta, hindustantimes, Theindianexpress और अन्य भरोसेमंद मीडिया रिपोर्ट्स पर आधारित है।

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