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PSLV Failure 2026: बड़ा झटका और गंभीर संकट – क्यों ‘Nervous Nineties’ का शिकार हुआ ISRO ? का वर्कहॉर्स?

PSLV Failure 2026

PSLV Failure 2026 ने ISRO को भारी झटका दिया है। लगातार दूसरी नाकामी में 16 सैटेलाइट्स खोए, जानिए वजह, नुकसान और आगे की चुनौती।

PSLV Failure 2026: ISRO के लिए दुखद शुरुआत

PSLV Failure 2026 ने भारतीय अंतरिक्ष मिशनों की मजबूत छवि को एक बड़ा झटका दिया है। 12 जनवरी 2026 को लॉन्च हुआ PSLV-C62 मिशन, जो इस साल की पहली उड़ान थी, पूरी तरह सफल नहीं हो सका।
सुबह 10:18 बजे रॉकेट ने flawless lift-off किया और लगभग 90% मिशन तक सब कुछ सामान्य रहा, लेकिन तीसरे स्टेज (PS3) के अंत में आई तकनीकी गड़बड़ी ने पूरे मिशन को पटरी से उतार दिया।

तीसरे स्टेज में क्या गड़बड़ हुई?

ISRO के शुरुआती बयान के अनुसार, PSLV Failure 2026 की मुख्य वजह तीसरे स्टेज में आया:

Roll Rate Disturbance – रॉकेट की घूमने की गति अचानक अस्थिर हो गई

Flight Path Deviation – तय trajectory से हटने के कारण required orbital speed नहीं मिल पाई

संभावित कारणों में solid motor pressure drop, nozzle control issue या vibration/control system failure शामिल माने जा रहे हैं। हैरानी की बात यह है कि यही समस्या पिछले PSLV-C61 मिशन में भी देखी गई थी।

16 सैटेलाइट्स का नुकसान

इस PSLV Failure 2026 के चलते DRDO का अहम EOS-N1 (अन्वेषा) सैटेलाइट और 15 co-passenger satellites सही orbit में नहीं पहुंच पाए।
इनमें defence, startups और universities से जुड़े payloads शामिल थे, जो अब या तो अंतरिक्ष में खो चुके हैं या atmosphere में जल चुके हैं।

कितना बड़ा नुकसान हुआ?

PSLV Launch Cost: ₹250–300 करोड़

EOS-N1 Satellite Cost: ₹200–400 करोड़

Total Estimated Loss: ₹500–800 करोड़+

इसके अलावा, ISRO, DRDO और NSIL के commercial credibility पर भी असर पड़ा है।

‘Nervous Nineties’ क्यों?

ISRO का सफलता दर SPV (94–95%) माना जाता है। लेकिन लगातार दो असफलताओं ने प्रश्न उठाए हैं—
क्या PSLV अब ‘Nervous Nineties’ phase में फंस रहा है?

ISRO चेयरमैन वी. नारायणन के अनुसार, data का detailed analysis जारी है और corrective measures जल्द लिए जाएंगे।

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