US Iran Tension फिर से गरमा गई है। Donald Trump के सख्त रुख के बीच America ने West Asia में दूसरा Aircraft Carrier भेज दिया है। क्या Persian Gulf में बढ़ेगा Military Conflict या Nuclear Deal पर बनेगा दबाव? पूरी रिपोर्ट पढ़ें।
US Iran Tension: पश्चिम एशिया में बढ़ता सैन्य दबाव
पश्चिम एशिया (West Asia) में एक बार फिर माहौल बेहद संवेदनशील होता जा रहा है। US Iran Tension अब सिर्फ बयानबाज़ी तक सीमित नहीं दिख रही, बल्कि ज़मीनी स्तर पर सैन्य गतिविधियाँ तेज हो गई हैं। ताज़ा घटनाक्रम में अमेरिका ने अपना दूसरा अत्याधुनिक एयरक्राफ्ट कैरियर USS Gerald R. Ford पश्चिम एशिया की ओर रवाना कर दिया है।
यह फैसला ऐसे समय आया है जब वॉशिंगटन और तेहरान के बीच Nuclear Program को लेकर बातचीत जारी है, लेकिन दोनों देशों के बीच भरोसे की कमी साफ दिखाई दे रही है।
US Iran Tension के बीच दूसरा Aircraft Carrier तैनात
अमेरिकी मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, यह Aircraft Carrier अब पहले से तैनात USS Abraham Lincoln Strike Group के साथ Persian Gulf क्षेत्र में मौजूद रहेगा।
बताया जा रहा है कि यह तैनाती आने वाले महीनों तक जारी रह सकती है। इसका सीधा मतलब है कि West Asia Military Presence पहले से कहीं ज्यादा मजबूत होने वाली है।
यह कदम अमेरिका की “pressure strategy” का हिस्सा माना जा रहा है, जिसका मकसद ईरान पर Nuclear Deal को लेकर दबाव बनाना है।
Trump Iran Policy: सख्त रुख और सैन्य विकल्प की चेतावनी
अमेरिकी राष्ट्रपति Donald Trump लगातार ईरान पर दबाव बनाए हुए हैं। हाल ही में इजराइल के प्रधानमंत्री के साथ बैठक के बाद उन्होंने साफ संकेत दिए कि अगर ईरान Nuclear Agreement पर आगे नहीं बढ़ा, तो “military option” भी टेबल पर है।
इससे पहले जून 2025 में “Operation Midnight Hammer” के तहत ईरान के फोर्डो, नतांज और इस्फहान स्थित परमाणु ठिकानों पर हमले किए गए थे। तेहरान ने इसे अंतरराष्ट्रीय कानून का उल्लंघन बताया था और कड़ी प्रतिक्रिया की चेतावनी दी थी।
यानी US Iran Tension अब सिर्फ कूटनीतिक बहस नहीं, बल्कि सैन्य रणनीति में बदलती दिख रही है।
ईरान का जवाब: Zero Enrichment मंजूर नहीं
ईरान की तरफ से भी बयान सख्त हैं। वरिष्ठ नेता Ali Larijani ने हाल ही में इंटरव्यू में कहा कि ओमान में अमेरिका के साथ अप्रत्यक्ष बातचीत जारी है।
लेकिन उन्होंने साफ कर दिया कि “Zero Enrichment” यानी पूरी तरह यूरेनियम संवर्धन बंद करना ईरान के लिए स्वीकार्य नहीं है।
सरकारी एजेंसी Islamic Republic News Agency (IRNA) के मुताबिक, ईरान ने चेतावनी दी है कि अगर अमेरिका ने हमला किया तो क्षेत्र में मौजूद अमेरिकी सैन्य ठिकाने भी निशाने पर होंगे।
इस बयान से साफ है कि Persian Gulf Crisis किसी भी वक्त बड़ा रूप ले सकती है।
बदला गया मिशन, बढ़ा खतरा
दिलचस्प बात यह है कि USS Gerald R. Ford की तैनाती पहले यूरोप के लिए तय थी। बाद में इसे कैरेबियन भेजा गया और अब अचानक West Asia की ओर मोड़ दिया गया।
रिपोर्ट्स के मुताबिक, जहाज पर तैनात सैनिकों को उम्मीद थी कि वे जल्द घर लौटेंगे, लेकिन मिशन बढ़ा दिया गया है।
यह बदलाव दिखाता है कि US Iran Tension को लेकर वॉशिंगटन कितना गंभीर है।
क्या बढ़ेगा बड़ा सैन्य टकराव?
विशेषज्ञ मानते हैं कि दो-दो Aircraft Carrier की तैनाती सीधा संकेत है कि अमेरिका “maximum pressure strategy” पर काम कर रहा है।
हालांकि बातचीत के दरवाज़े पूरी तरह बंद नहीं हुए हैं, लेकिन जमीनी हकीकत यह है कि एक छोटी सी गलती भी बड़े सैन्य संघर्ष में बदल सकती है।
दुनिया की निगाहें फिलहाल Persian Gulf पर टिकी हैं। सवाल यही है –
क्या यह दबाव Nuclear Deal को आगे बढ़ाएगा?
या फिर Middle East में एक नया Military Crisis जन्म लेगा?
Donald Trump India Trade Deal पर हमारा पिछला विश्लेषण पढ़ें।
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निष्कर्ष
US Iran Tension एक बार फिर खतरनाक मोड़ पर खड़ी है। Trump का सख्त रुख, West Asia में बढ़ती Military Deployment और ईरान की खुली चेतावनी – ये सभी संकेत बताते हैं कि आने वाले महीने बेहद संवेदनशील हो सकते हैं।
अब देखना यह है कि कूटनीति (Diplomacy) जीतती है या फिर Middle East एक नए संघर्ष की आग में झुलसता है।
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